💥 माया कैसे रची जाती है 😉😉
आपको पहले शनि की दशा दी जाती है जिसमे आप खुलकर मेनहत करते हो ,थोड़ा असन्तोष भी रहता है बदन तोड़ परिश्र्म करके जो कमा पाते हो फिर वैसे ही बुध की दशा लग जाती है।बेचारे इसमें पूरा मैनेजमेंट लगाते हैं नई नई तरकीब लगाते है कि उस धन को कैसे इखट्टा करा जाय और इसमें ही सालों बीत जाते है फिर आते है उतने में ही केतु महाराज जो कहते अरे मूर्ख क्या लगा पड़ा है इस माया में, बाहर निकल तू उस मार्ग में चल जिसमे में तुझे बताता हूं इसमें तुझे परमाननंद मिलेगा इतने में व्यक्ति थोड़ी अन्तर्ज्ञानी बनने के तरफ रुख करता है और अब शुक्र आ जाते है वो कहते है तू क्या काम कर रहा है पागल भगवान को किसी ने देखा है क्या ? बड़े मुश्किल से मनुष्य जीवन मिलता है full मजे कर इसमें जो होगा देख लेंगे वैसे भी इतजे जन्मों से भी तो भटक ही रहे है ।
बस यही घटनाक्रम चलता रहता है यही माया है और कुछ विशेष नही है

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