शरणागति समर्पण भाव।
जब विभीषण अपना सब कुछ त्यागकर भगवान राम की शरण मे जाता है तो पता है है भगवान क्या कहते है ?
भगवान कहते है - जो एक बार मेरी शरण मे आकर( में तुम्हारा हु) ऐसा कहकर मुझसे अभय चाहता है,उसको में सभी भूतों का अभयदान देता हूं यह मेरा व्रत है ।अर्थात जितने जन्म से हम भटके आ रहे है जितने पाप किये आ रहे है एक मात्र शरणागत हो जाने से में तुम्हे हर चीज से मुक्त कर दूंगा।तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो
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